चार सूत्रीय मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे कोटवार, शासन के रवैये पर जताया आक्रोश
प्रदेशभर में कोटवारों का प्रदर्शन, नियमितीकरण और राजस्व विभाग में संविलियन की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोटवारों का प्रदेशव्यापी जिला स्तरीय एक दिवसीय धरना आंदोलन सफल रहा। प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों में कोटवारों ने एकजुट होकर नारेबाजी की और शासन के कथित उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ आक्रोश जताया। संघ के प्रांताध्यक्ष प्रेम किशोर बाघ ने आंदोलन में शामिल प्रदेशभर के कोटवारों का आभार जताते हुए संगठन की एकजुटता बनाए रखने के लिए धन्यवाद दिया।
कोटवार संघ लंबे समय से अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है। संघ का कहना है कि आजादी से पहले से पीढ़ी-दर-पीढ़ी सेवा देने के बावजूद कोटवारों को नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। उनकी मांग है कि कोटवारों को नियमित कर राजस्व विभाग में संविलियन किया जाए और सम्मानजनक वेतन दिया जाए।
संघ के अनुसार, वर्ष 2023 में तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने प्रत्येक वर्ग के कोटवारों के मानदेय में 1,500 रुपये की वृद्धि की थी। संघ का आरोप है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। कोटवारों ने न्यूनतम 15,000 रुपये मासिक मानदेय दिए जाने की मांग की है।
इसके अलावा नगर पालिका निगम क्षेत्रों में कोटवारों की नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाने की मांग भी उठाई गई। संघ ने चेतावनी दी है कि दीपावली से पहले मांगों का निराकरण नहीं होने पर प्रदेश के कोटवार नवंबर माह में कभी भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं।
धरना प्रदर्शन में प्रांताध्यक्ष प्रेम किशोर बाघ, जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार चौहान, प्रांत के पूर्व उपाध्यक्ष त्रिभुवनदास मानिकपुरी, कोषाध्यक्ष भूषण दास मानिकपुरी, कार्यालय सचिव त्रिलोकी मानिकपुरी, मीडिया प्रभारी गिरवर दास मानिकपुरी सहित विभिन्न तहसीलों के अध्यक्ष, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कोटवार शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार, धरना स्थल पर करीब 400 कोटवार उपस्थित रहे।



