छत्तीसगढ़

सेवा की कहानी : बिहान से मिली नई उड़ान, हुस्ना परवीन बनीं लखपति दीदी

सिलाई के हुनर को कपड़ा व्यवसाय में बदला, परिवार को दे रहीं आर्थिक संबल

महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की पहल ग्रामीण अंचलों में नई संभावनाएं खोल रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के सहयोग से सूरजपुर जिले के विकासखंड भैयाथान अंतर्गत ग्राम दतिमा की श्रीमती हुस्ना परवीन ने सिलाई के अपने हुनर को स्वरोजगार का आधार बनाया। समूह से मिली सहायता और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने सिलाई के काम को कपड़ा व्यवसाय तक विस्तार दिया और आज परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं।
श्रीमती हुस्ना परवीन बताती हैं कि वे पहले सिलाई का काम करती थीं। इससे होने वाली सीमित आय में परिवार का खर्च चलाना और बच्चों की पढ़ाई की जरूरतें पूरी करना कठिन था। वे अपना काम बढ़ाना चाहती थीं, लेकिन पूंजी की कमी उनके रास्ते में बाधा बन रही थी। बिहान के तहत स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ऋण लेकर व्यवसाय आगे बढ़ाने का अवसर मिला।

उन्होंने समूह के माध्यम से 30 हजार रुपये का ऋण लेकर  मैचिंग सेंटर शुरू किया। काम के साथ उनका अनुभव और आत्मविश्वास बढ़ा। आगे चलकर उन्होंने कपड़ों का व्यवसाय भी शुरू किया। इस तरह सिलाई के हुनर और समूह से मिले आर्थिक सहयोग ने उनके लिए आजीविका का नया रास्ता बनाया।
आज श्रीमती हुस्ना अपने व्यवसाय से आय अर्जित कर परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटा रही हैं और बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठा रही हैं। श्रीमती हुस्ना कहती है कि मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद देती हूं।उनके नेतृत्व में मुझे बिहान समूह से जुड़ने और शासन की योजनाओं से मिले सहयोग ने मुझे आगे बढ़ने का अवसर दिया। जिससे आज मैं लखपति दीदी बन गई हूं।”

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