छत्तीसगढ़

वाड्रफनगर नगर रेंजर पर कार्रवाई में कथित भेदभाव के आरोप, अतिक्रमण के मामलों में अलग-अलग रवैये पर उठे सवाल

एक ही तरह के अतिक्रमण के मामलों में किसी पर कार्रवाई तो किसी को कथित छूट क्यों? शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप

बसंतपुर/वाड्रफनगर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र में अतिक्रमण और वनभूमि के उपयोग को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर से सामने आई शिकायतों के अनुसार, वन क्षेत्र में लंबे समय से कई स्थानों पर कथित रूप से अतिक्रमण कर खेती की जा रही है, लेकिन शिकायतों के बावजूद सभी मामलों में समान कार्रवाई नहीं होने का आरोप है।

स्थानीय लोगों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वाड्रफनगर रेंज क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर वनभूमि पर अलग-अलग स्थानों पर अतिक्रमण कर खेती किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप यह भी है कि कुछ मामलों में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, जबकि इसी तरह के अन्य मामलों में शिकायत मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।

इसी कथित असमान कार्रवाई को लेकर अब सवाल उठ रहा है कि यदि वनभूमि पर अतिक्रमण अपराध है, तो समान परिस्थितियों में कार्रवाई का पैमाना अलग-अलग क्यों दिखाई देता है?


कोटराही के कौवाखो में वृक्षारोपण वाली जमीन पर खेती का आरोप

मिली जानकारी के अनुसार, वाड्रफनगर रेंज कार्यालय से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर ग्राम पंचायत कोटराही के कौवाखो क्षेत्र में करीब 5 से 7 हेक्टेयर भूमि पर पूर्व में वन विभाग द्वारा दो बार वृक्षारोपण कराया गया था।

स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक, वर्तमान समय में उक्त स्थान पर वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों में से एक भी पौधा मौजूद नहीं है और वहां कथित तौर पर धान की खेती की जा रही है।

इस मामले की जानकारी स्थानीय स्तर पर वन विभाग के अधिकारियों तक पहुंचाए जाने की बात कही जा रही है। शिकायत के अनुसार, संबंधित व्यक्ति द्वारा वाड्रफनगर रेंजर रामनारायण सारथी को मौखिक रूप से भी मामले की जानकारी दी गई, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद अब तक मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि उक्त भूमि पर वास्तव में वन विभाग द्वारा पूर्व में वृक्षारोपण कराया गया था और वर्तमान में वहां खेती की जा रही है, तो भूमि की वर्तमान स्थिति की जांच, सीमांकन और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया जाना आवश्यक है और वन विभाग का पक्ष इस मामले में महत्वपूर्ण रहेगा।


धनवार बीट में खैर के पौधों के गायब होने का आरोप

इसी तरह का एक अन्य मामला बनारस रोड के किनारे स्थित धनवार बीट से जुड़ा बताया जा रहा है।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यहां कभी खैर प्रजाति के लगभग 50 पौधे मौजूद थे। आरोप है कि समय के साथ इन पौधों को काटकर समाप्त कर दिया गया और वर्तमान में संबंधित स्थान पर मक्का एवं ज्वार की फसल लगी हुई है।

स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि इस संबंध में वाड्रफनगर रेंजर को कार्यालय पहुंचकर मौखिक रूप से जानकारी दी गई थी। बावजूद इसके, शिकायतकर्ता का आरोप है कि मौके पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी।

यदि इन आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो मामला केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वनभूमि, वृक्षारोपण क्षेत्र और वन संपदा के संरक्षण से जुड़े विभागीय दायित्वों पर भी सवाल खड़े होंगे।


एक व्यक्ति का झाला हटाया, दूसरे स्थानों पर कब्जे पर सवाल

स्थानीय लोगों द्वारा एक और गंभीर आरोप लगाया जा रहा है कि संबंधित क्षेत्र में एक सामान्य व्यक्ति द्वारा बनाया गया झाला/अस्थायी आवास हटाकर उसे उखाड़कर फेंक दिया गया, जबकि दूसरी ओर कथित रूप से बाहर से आए कुछ लोग स्थायी मकान बनाकर वनभूमि पर कब्जा कर रहे हैं।

यही स्थिति कथित तौर पर स्थानीय लोगों के बीच असंतोष का कारण बन रही है।

लोगों का सवाल है कि यदि वनभूमि पर कब्जा करना नियमों के विरुद्ध है, तो कार्रवाई सभी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ समान रूप से क्यों नहीं होनी चाहिए?

वहीं, यदि किसी व्यक्ति का कब्जा वैध है और किसी अन्य का अवैध, तो विभाग द्वारा रिकॉर्ड, सीमांकन और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती?


‘चार लोग अतिक्रमण करें तो कार्रवाई सिर्फ एक पर क्यों?’ उठ रहा सवाल

पूरे मामले में स्थानीय स्तर पर सबसे ज्यादा चर्चा कथित दोहरे मापदंड को लेकर है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि एक ही क्षेत्र में चार लोगों द्वारा समान प्रकृति का अतिक्रमण किया गया है, तो सभी मामलों की जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन यदि चार में से केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और बाकी मामलों में कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किस व्यक्ति का कब्जा कानूनी रूप से अतिक्रमण है और किसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई या नहीं हुई, इसका अंतिम निर्धारण संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, स्थल निरीक्षण और सक्षम अधिकारी की जांच के बाद ही किया जा सकता है।


क्या शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार किया गया?

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि स्थानीय लोगों द्वारा दी गई मौखिक शिकायतों को वन विभाग ने किस रूप में दर्ज किया।

यदि किसी अधिकारी को वनभूमि पर अतिक्रमण, पेड़ों की कटाई या अवैध खेती की जानकारी दी जाती है, तो संबंधित स्थान का निरीक्षण कर पंचनामा, स्थल निरीक्षण रिपोर्ट, सीमांकन, राजस्व एवं वन अभिलेखों का मिलान जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

ऐसे में यह जानना भी जरूरी होगा कि कौवाखो और धनवार बीट से संबंधित शिकायतों पर विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की है और क्या इन स्थानों का निरीक्षण किया गया है।


क्या विभागीय जांच होगी?

मामले को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद वन विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा?

यदि संबंधित स्थानों पर वास्तव में वनभूमि पर अतिक्रमण, अवैध खेती या पेड़ों की कटाई हुई है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई किए जाने की मांग उठ रही है। वहीं यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं तो वन विभाग को भी मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।

स्थानीय लोगों की मांग है कि कौवाखो, धनवार बीट और आसपास के संदिग्ध अतिक्रमण वाले क्षेत्रों का उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में स्थल निरीक्षण कराया जाए, वन एवं राजस्व रिकॉर्ड का मिलान किया जाए और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जाए।


वन विभाग की कार्यप्रणाली पर जवाब जरूरी

इस पूरे मामले में वाड्रफनगर रेंज की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब वन विभाग के अधिकारियों से अपेक्षित है।

क्या कौवाखो में 5 से 7 हेक्टेयर भूमि पर पहले वृक्षारोपण हुआ था?
क्या वर्तमान में वहां धान की खेती हो रही है?
क्या धनवार बीट में खैर के पौधे लगाए गए थे?
क्या वहां अब मक्का-ज्वार की खेती हो रही है?
क्या इन मामलों की शिकायत विभाग को मिली थी?
यदि मिली थी तो अब तक क्या कार्रवाई की गई?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या समान प्रकृति के सभी अतिक्रमण मामलों में समान कार्रवाई की जा रही है?

इन सवालों के जवाब वन विभाग की ओर से सामने आना जरूरी है।


अब देखना होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग क्या कदम उठाता है

वाड्रफनगर क्षेत्र में वनभूमि और अतिक्रमण से जुड़े इन आरोपों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल सामने आई जानकारी स्थानीय शिकायतों और सूत्रों पर आधारित आरोपों के रूप में है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच किया जाना आवश्यक है।

मीडिया 36 डिजिटल मीडिया की ओर से संबंधित वन विभाग के अधिकारियों का पक्ष भी सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है। यदि विभाग जांच कराता है तो जांच के निष्कर्षों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन मामलों में नियमानुसार कार्रवाई आवश्यक है।

रिपोर्ट: देव कृष्णा पांडे, न्यूज़ रिपोर्टर
मीडिया 36 डिजिटल मीडिया, वाड्रफनगर, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज, छत्तीसगढ़

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