IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री के फैसले का AIIEA ने किया विरोध, निजीकरण प्रस्ताव रद्द करने की मांग
IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री पर बीमा कर्मचारी संगठन नाराज, सरकार से निजीकरण रोकने की मांग

रायपुर। ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIIEA) ने IDBI बैंक में भारत सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की संयुक्त हिस्सेदारी बेचने के निर्णय की निंदा की है। संगठन के अध्यक्ष धर्मराज महापात्र और महासचिव श्रीकांत मिश्रा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केंद्र सरकार से निजीकरण के प्रस्ताव को रद्द करने की मांग की है।
एसोसिएशन के अनुसार, कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने IDBI बैंक में सरकार और LIC की संयुक्त रूप से 60.72 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी कनाडा स्थित फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को 52,878 करोड़ रुपये में बेचने के निर्णय को मंजूरी दी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें भारत सरकार की 30.48 प्रतिशत और LIC की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।
लाभ में चल रहे बैंक के निजीकरण पर उठाए सवाल
AIIEA ने कहा कि IDBI बैंक लगातार लाभ कमा रहा है और उसके प्रमुख वित्तीय एवं परिचालन मापदंडों में सुधार हुआ है। ऐसे में बैंक की हिस्सेदारी बेचने के फैसले पर सवाल उठते हैं। संगठन का मानना है कि बैंक के बेहतर प्रदर्शन के बीच निजीकरण की आवश्यकता पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
एसोसिएशन ने वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री द्वारा संसद में दिए गए उस आश्वासन का भी उल्लेख किया, जिसमें IDBI में कम से कम 51 प्रतिशत सरकारी इक्विटी हिस्सेदारी बनाए रखने की बात कही गई थी। संगठन के अनुसार, प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री उस आश्वासन की भावना से अलग है।
विनिवेश लक्ष्य को लेकर सरकार पर निशाना
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि यह फैसला किसी अनिवार्य आर्थिक आवश्यकता के बजाय चालू वित्त वर्ष के 80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने की मंशा से प्रेरित प्रतीत होता है। संगठन ने एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बैंक का नियंत्रण विदेशी वित्तीय संस्था को सौंपने के निर्णय पर भी आपत्ति जताई।
LIC और IDBI बैंक के बीच साझेदारी बनाए रखने की वकालत
AIIEA का कहना है कि LIC को IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी कम करने की आवश्यकता नहीं थी। संगठन के अनुसार, दोनों संस्थानों के बीच मौजूदा साझेदारी को बनाए रखते हुए बैंकिंग और बीमा सेवाओं के बेहतर एकीकरण की संभावनाओं पर काम किया जा सकता था।
एसोसिएशन ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों के निजीकरण का असर ग्राहकों, कर्मचारियों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए इस तरह के निर्णय लेते समय व्यापक जनहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
निजीकरण प्रस्ताव रद्द करने की मांग
ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने IDBI बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के संघर्ष के प्रति एकजुटता व्यक्त की है। संगठन ने केंद्र सरकार से ग्राहकों, कर्मचारियों, अर्थव्यवस्था और आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए IDBI बैंक के निजीकरण के प्रस्ताव को रद्द करने की मांग की है।
नोट: इस खबर में निजीकरण संबंधी आपत्तियां और आरोप AIIEA की प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं।


