छत्तीसगढ़

किसानों की दिवाली फीकी कर रही साय सरकार – कांग्रेस का बड़ा आरोप

अग्रिम भुगतान की घोषणा करे और रकबा समर्पण बंद करें

भाजपा सरकार पर किसानों से वादाखिलाफी और षड्यंत्रकारी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि छत्तीसगढ़ का अन्नदाता गहरी पीड़ा और संकट के दौर से गुजर रहा है। जिस धान और किसानी के बूते छत्तीसगढ़ की संस्कृति और अर्थव्यवस्था धड़कती है, उसी अन्नदाता के साथ भाजपा सरकार क्रूर मजाक कर रही है। सिर पर दीपावली का त्योहार है, लेकिन किसानों के घरों में अंधेरा है। सरकार ने चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन आज हकीकत यह है कि किसान रकबा कटौती के षड्यंत्र, टोकन और तौल की धांधली का शिकार हो रहा है। हम मांग करते हैं कि सरकार तत्काल 3358 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ का एकमुश्त भुगतान और दिवाली से पहले एडवांस सुनिश्चित करे, अन्यथा कांग्रेस पार्टी राज्यभर के किसानों के साथ सड़क से सदन तक आर-पार की लड़ाई लड़ेगी।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि डबल इंजन सरकार की दुर्भावना से छत्तीसगढ़ का अन्नदाता इस समय भारी आर्थिक संकट और मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहा है। दिवाली जैसा बड़ा त्योहार सिर पर है, लेकिन किसानों के पास जेब में फूटी कौड़ी नहीं है। 21 क्विंटल प्रति एकड़ खरीदी के नाम पर रकबा कटौती की जा रही है, जबकि एकमुश्त भुगतान के बजाय किसानों को उलझाया जा रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के समय जो राजीव गांधी किसान न्याय योजना के चौथे किश्त का 1700 करोड़ बजट प्रावधान था उसे भी भाजपा की सरकार पौने तीन साल से रोके रखी है। फर्जी गिरदावली और काल्पनिक अनावरी रिपोर्ट का अघोषित षड्यंत्र धड़ल्ले से चल रहा है, जिससे हजारों किसान पंजीयन से बाहर हो रहे हैं। आज न तो 3100 के वायदे में 258 रुपए समर्थन मूल्य में वृद्धि का लाभ देकर 3358 रुपए प्रति क्विंटल की घोषणा कर रही है, न ही टोकन और तौलाई को लेकर पारदर्शी एलाइनमेंट मिल रहा है, और न ही दिवाली से पहले कोई अग्रिम भुगतान या राहत पैकेज दिया जा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि भाजपा सरकार की बदनीयती से छत्तीसगढ़ के किसान की रीढ़ टूट रही है। खाद, बीज, डीजल और कृषि उपकरणों के दाम आसमान छू रहे हैं। दिवाली के पावन पर्व पर बच्चों के नए कपड़े और घर की खुशियों के लिए किसान साहूकारों के कर्ज के दलदल में धंसने को मजबूर हो गए हैं। सरकार की नीयत में खोट है। वह किसानों को दिवाली की खुशियों से वंचित रखना चाहती है। जबरिया रकबा समर्पण के नाम पर किसानों की जमीन को फर्जी कारणों से सूची से बाहर करना और टोकन-तौल-परिवहन-मिलिंग में पारदर्शिता के अभाव का सीधा मतलब है कि सरकार किसानों को बिचौलियों और मिलर्स के हाथों लुटवाने के लिए मजबूर कर रही है। छत्तीसगढ़ किसानी की धरती है। यहाँ का किसान छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। भाजपा सरकार दिल्ली के इशारों पर छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं की दीपावली को अंधेरे में धकेल रही है। छत्तीसगढ़िया किसानों के हक पर डाका डालने वाली इस सरकार को छत्तीसगढ़ की जनता माफ नहीं करेगी।

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