छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री को विधानसभा सत्रों की अवधि बढ़ाने डॉ. चरणदास महंत ने लिखा पत्र।

सदन में संवाद का अभाव जनसमस्याओं को सड़कों पर आंदोलन का रूप देता है - नेता प्रतिपक्ष

छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेश की ज्वलंत और मूलभूत समस्याओं पर गंभीर, खुली और सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने के लिए आगामी विधानसभा सत्रों की अवधि तथा बैठकों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया है।

​नेता प्रतिपक्ष डॉ. महंत ने कहा कि विधानसभा केवल वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने का मंच नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की तीन करोड़ जनता की उम्मीदों, आकांक्षाओं और पीड़ा को स्वर देने वाली सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ किसानों की समस्याओं, बिजली संकट, चरमराती कानून-व्यवस्था, बदहाल सड़कों, स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों तथा अधोसंरचना के विकास जैसे कई संवेदनशील मुद्दों से जूझ रहा है। इन गंभीर विषयों का स्थायी समाधान केवल प्रशासनिक आदेशों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनप्रतिनिधियों के बीच गहन विचार-विमर्श और सरकार की जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

​विगत सत्रों की सीमित कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. महंत ने कहा कि सदन की कार्यावधि छोटी होने के कारण महत्वपूर्ण ध्यानाकर्षण, स्थगन और शून्यकाल की सूचनाएं बिना विस्तृत चर्चा के ही समाप्त हो जाती हैं। इससे विपक्ष को जनहित के मुद्दे उठाने का अवसर नहीं मिल पाता और सदन में संवाद की मूल भावना आहत होती है।

​डॉ. महंत ने स्पष्ट चेताते हुए कहा, “जब लोकतांत्रिक मंचों पर जनता की आवाज को पर्याप्त समय और संवेदनशीलता के साथ नहीं सुना जाता, तो वे समस्याएं सदन की चारदीवारी से निकलकर सड़कों पर आ जाती हैं। आज स्थिति यह है कि स्कूली छात्र-छात्राएं तक अपनी बुनियादी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को विवश हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए अत्यंत चिंताजनक है। यदि सदन के भीतर संवाद के पर्याप्त अवसर हों, तो जन-असंतोष और विवादों का समय रहते शांतिपूर्ण समाधान निकल सकता है।

​नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष वैचारिक रूप से भिन्न हो सकते हैं, किंतु जनकल्याण के प्रति दोनों की संवैधानिक जवाबदेही समान है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष, कार्यमंत्रणा समिति और शासन से अपील की है कि सर्वदलीय सहमति बनाकर आगामी सत्रों के कार्यदिवसों में वृद्धि की जाए। सत्र की अवधि बढ़ने से जहां सरकार को जमीनी हकीकत समझने का अवसर मिलेगा, वहीं विपक्ष भी तथ्यों के साथ जनभावनाओं को पटल पर रख सकेगा, जिसका सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के समग्र विकास और आम नागरिक को मिलेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button