छत्तीसगढ़

सेवा की कहानी : जिले में 96 हजार से अधिक पेंशनधारियों को मिल रहा प्रतिमाह पेंशन

दिव्यांगों, बुजुर्गों एवं महिलाओं को सम्मान पूर्वक जीवन जीने का मिला सहारा

दिव्यांगों, बुजुर्गों एवं महिलाओं को सम्मान पूर्वक जीवन जीने का मिला सहारा

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा के दौरान जनकल्याण और जरूरतमंद वर्गों के सशक्तिकरण को निरंतर प्राथमिकता दी गई है। इसी सेवा और समर्पण की भावना के अनुरूप राज्य शासन द्वारा समाज कल्याण विभाग के माध्यम से जिले के बुजुर्गों, दिव्यांगजनों, विधवा महिलाओं एवं जरूरतमंद हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का लाभ नियमित रूप से प्रदान किया जा रहा है। इन योजनाओं से जिले के हजारों परिवारों को आर्थिक संबल मिला है और हितग्राहियों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का सहारा प्राप्त हुआ है।

सेवा संकल्प की भावना के अनुरूप समाज कल्याण विभाग द्वारा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम के तहत संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं के माध्यम से महासमुंद जिले में कुल 96 हजार 765 पेंशन हितग्राही पंजीकृत हैं। इनमें से 96 हजार 254 हितग्राहियों को प्रतिमाह डीबीटी के माध्यम से कुल 4 करोड़ 83 लाख 82 हजार 500 रुपए की पेंशन राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। इसमें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के 32 हजार 304, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के 9 हजार 396, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के 939, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के 24 हजार 109, सुखद सहारा पेंशन योजना के 9 हजार 74 तथा मुख्यमंत्री पेंशन योजना के 20 हजार 432 हितग्राही शामिल हैं।

इसी प्रकार राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में जून 2026 तक जिले के 56 हितग्राहियों को प्रति हितग्राही 20 हजार रुपये की दर से कुल 11 लाख 20 हजार रुपए की एकमुश्त सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में प्रदान की गई है।

पेंशन और सहायता राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से हितग्राहियों को कार्यालयों के चक्कर लगाने तथा राशि प्राप्त करने में होने वाली आर्थिक एवं शारीरिक परेशानियों से राहत मिली है। नियमित रूप से मिलने वाली पेंशन राशि से बुजुर्ग, दिव्यांगजन और जरूरतमंद महिलाएं अपनी दवाइयों, दैनिक आवश्यकताओं एवं अन्य छोटे खर्चों को स्वयं पूरा कर पा रहे हैं। इससे उनमें आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ आत्मसम्मान की भावना भी मजबूत हुई है।

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